शनिवार, 9 मई 2020

अमित राणा की मौत से उठे कई सवाल

amit rana 


 
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नई दिल्ली  । दिल्ली पुलिस में कॉस्टेबल के पद पर तैनात अमित राणा की मौत ने कई सवालों को खड़ा कर दिया है । इस घटना ने कोरोना वायरस से लडने के लिए सरकार के दांवों की भी पोल खोल दी है। दिल्ली पुलिस के जवान में वे सारे लक्षण दिखाई दे रहे थे जो एक कोरोना पीडित मरीज के होते है । हालत भी इतनी ज्यादा खराब थी कि वे बोलने में असमर्थ महसूस कर रहें थे तो सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी ज्यादा हालत खराब होने के बाद भी किसी अस्पताल ने उन्हें भर्ती क्यों नहीं किया। जबकि अमित राणा दिल्ली पुलिस में तैनात थे और कोरोना वायरस के खिलाफ लडने में पहली पंक्ति के योद्धा थे जिन्हें कोरोना होने का खतरा सबसे ज्यादा था उसके बाद भी अस्पतालों की लापरवाही ने उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी।

ऑडियो क्लिप ने खड़े किए सवाल

अमित राणा की मौत के बाद एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रहा है जिसे सुनकर सवाल खडा होता है कि कोरोना वायरस से लडने के लिए क्या  सरकार की तैयारी पूरी है  जैसा की सरकार दावा करती है। अगर ऐसा है तो अमित राणा को भर्ती क्यों नहीं किया गया । क्लिप के अनुसार ज्यादातर जगहों पर केवल टेस्ट हो रहे है और जब तक टेस्ट का रिजल्ट नहीं आ जाता तब तक मरीज को भर्ती भी नहीं किया जा रहा है। चाहे उसमें कोरोना के सारे लक्ष्ण दिखाई दे रहे हो।  क्लिप के अनुसार अमित राणा का हालत इतनी खराब थी वे दिल्ली पुलिस अपनी ड्यूटी पर तैनात थे जिसके कारण उनहें कोरोना की चपेट में आने की संभावना काफी ज्यादा थी उसके बाद भी अमित को केवल दवाई देकर वापस भेज दिया गया। उसके साथ उसके दोस्त थे।

कोरोना टेस्ट की गिनती सीमित

क्लिप से पता चला है कि एक अस्पताल ने तो उनका टेस्ट भी करने से मना कर दिया क्योंकि एक दिन में जितने टेस्ट होने चाहिए उनकी गिनती पूरी हो चुकी थी। अगर अस्पताल कोरोना वायरियर्स के लिए अपनी टेस्ट की निश्चित संख्या से एक ज्यादा टेस्ट भी नहीं कर सकता तो कोरोना वायरियर्स पर पुष्पों की संख्या करना सब बेकार है। केवल एक दिखावा जो आपको कार्य करने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 
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क्लिप में क्या है

क्लिप से पता चलता है कि अमित के दोस्त उसकी तबीयत खराब होने के बाद कई अस्पतालों में चक्कर लगाते रहे लेकिन किसी ने भी उसे एडमीट करने की जहमत नहीं उठाई केवल कुछ मामूली दवा देकर घर भेज दिया । काफी परेशानी के बाद कोरोना टेस्ट किया गया लेकिन टेस्ट का रिजल्ट आने तक भर्ती करने से मना कर दिया।  ऐसा ही एक मामला सत्यकेतन समाचार के द्वारा भी पता चला था जहां एक मरीज की तबीयत काफी खराब होने पर भी किसी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया । खबर चलने के बाद उसे भर्ती किया गया।

अमित राणा की मौत के बाद सब आए आगे 



अमित राणा की मौत के बाद तो दिल्ली पुलिस आयुक्त ने अमित के परिवार से बात की और सांत्वना दी है तो दूसरी दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने अमित के परिवार को एक करोड रुपए देने की घोषणा की है लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन घोषणाओं से क्या अपनी नाकामयाबी को छुपाया जा सकता है क्या।

अमित राणा का परिवार भी कोरोना पॉजिटिव

कोरोना की गंभीरता को सरकार शायद समझने में नाकाम रही है जिसके कारण कोरोना पोजिटिव का जब तक टेस्‍ट के परिणाम का पता नहीं चल जाता किसी को भर्ती नहीं किया जाता है लेकिन अगर कोई व्‍यक्ति कोरोना से पीडित है तो जब तक उसका परिणाम आएगा वह कितनों को इस बीमारी से ग्रस्‍त कर चुका होगा अंदाजा लगाना मुश्किल है । इसके साथ ही साथ यह बात भी सत्‍य है कि हमारे पास अभी इतनी सुविधा नहीं है कि हम तुरंत कोरोना टेस्‍ट का परिणाम हासिल कर सकें या बहुत सारे टेस्‍ट कर सकें । इससे बचने का एक ही रास्‍ता है अगर किसी में भी लक्षण दिखाई दे तो उसे तुरंत भर्ती किया जाए और टेस्‍ट का रिजल्‍ट आने तक हर संभव प्रयास किया जाए लेकिन देखने में यह आ रहा है कि लक्षण दिखाई देने पर भी अस्‍पताल मरिज को अपने घर भेज देते है जिसके कारण जब तक उसका टेस्‍टपरिणाम आता है कोरोना पीडित अन्‍य कई लोगों को भी कोरोना दे चुका होता है । अमित के परिवार में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। 











एक जगह मिले 46 कोरोना पीडित लोग

दिवंगत दिल्ली पुलिस कांस्टेबल अमित राणा का परिवार कोरोना पॉजिटिव

 


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