गुरुवार, 21 मई 2020

LOCK DOWN से किसका हुआ फायदा पढिये और सोचिए

LOCK DOWN से किसका हुआ फायदा पढिये और सोचिए

medical store
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नई दिल्ली। लाॅकडाउन (LOCK DOWN ) से पूरा देश और दुनिया परेशान है। सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग ही मजबूर है । लेकिन इतिहास गवाह है कि मजबूरी में कुछ हाथ बढे सहायता के लिए तो कुछ हाथों ने मजबूरी की ज्यादा से ज्यादा कीमत लगाकर अपना फायदा करने की कोशिश की। ऐसा ही लाॅकडाउन (LOCK DOWN ) के समय भी देखने में नजर आया। मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने अपनी जेब भरी तो कुछ ने अपनी जेब खाली कर इन लोगों का फायदा करने की कोशिश की। लेकिन आज हम आपको बताते है कि आखिर किन किन लोगों ने अपनी जेब भरने की कोशिश की।

LOCK DOWN में मेडिकल वालों ने छापा खूब पैसा

जब कोरोना वायरस coronavirus का प्रकोप शुरू हुआ तो देखने में आया कि मेडिकल स्टोर वाले जिस  मास्क को 3 से 4 रूपए तक में बेचते थे उसी को  LOCKDOWN में 20 से 25 रूपए में बेचा। इसके अलावा एक न्यूज चैनल के स्टिंग आपरेशन में भी यह देखा गया कि कुछ कंपनियों ने साधारण तौर पर तीन से चार लाख में बिकने वाले वेंटिलेटर को छह सात लाख रूपए में बेचा। जिसे कुछ अमीर लोगों ने सावधानी के तौर पर केवल इस लिए खरीदा ताकि अगर  उनके परिवार में कोई बीमार हो जाए तो वह समय से वेंटिलेटर उपलब्ध हो जाए। इसके अलावा मेडिकल स्टोर वालों से फायदे के अनुसार सेनेटाइजर भी ज्यादा दामों पर बेचा जिसके कारण सरकार को इनकी एक निश्चित कीमत तय करनी पडी।


LOCK DOWN में बस सर्विस 

लाॅकडाउन के लगभग 60 दिन होने के बाद भी जहां थोडी सी राहत दे दी गई है तो लोग अपने घरों पर जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है जिसके कारण कुछ बस सर्विस वाले इसका काफी फायदा उठाने में लगे हुए है। जहां पहले दिल्ली से बिहार जाने के लिए एक व्यक्ति का बस का किराया 1000 से 1500 रूपए तक होता था वहीं अब LOCKDOWN में 4000 हजार रूपए से लेकर पांच हजार रूपए प्रति व्यक्ति  तक बस का किराया वसूला जा रहा है। जिसे आप मजबूरी का फायदा उठाना नहीं तो और क्या कहेंगे।

LOCKDOWN में बाजार की मार 
लाॅकडाउन से पूरा देश अपने घरों में बंद हो गया। सरकार की और से जरूरी सामान लाने ले जाने पर किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं थी लेकिन लोगों ने इस मौके को अपनी जेब गर्म करने का सबसे बेहतर मौका समझा और सभी सामानों को ज्यादा से ज्यादा दामों पर बेचा ताकि ज्यादा पैसा कमाया जा सकें। कुछ अधिकारियों ने इस संबंध में कार्यवाही करते हुए कुछ दुकानदारों पर फाईन किया तो कई पर आधिकारिक कार्यवाही की लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर जब पूरा देश गंभीर स्थिति से गुजर रहा है तो उस समय क्या अपने फायदे की सोचना सही कदम है।
vegetables
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इसके अलावा भी हर दिशा में मजबूर लोगों की जेब से ज्यादा से ज्यादा पैसा निकालने का हर संभव प्रयास हर दिशा में किया गया। किसी ने एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए अपने मुताबिक पैसे मांगे । एक समाचार चैनल के स्टिंग आपरेशन में तो यहां तक दिखाई दिया कि मजबूर लोगों को एंबुलेंस के द्वारा एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के बारे में बात की जा रहीं थी ताकि पैसे कमाए जा सकें। अब आप इसे क्या कहेगे । पंद्रह अगस्त , 26 जनवरी पर देशभक्ति दिखाने वाले आज कहां है । देशभक्ति दिखाने का असली समय आज है लेकिन कुछ लोग इस समय को केवल अपनी जेब भरने के लिए देख रहे है।

सहायता के लिए हाथ भी आए आगे

लाॅकडाउन में स्वयं सेवी संस्थाएं और व्यक्तिगत तौर पर भी कुछ लोगों ने हर संभव प्रयास किया कि लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो। किसी ने अपनी बचत की कमाई से जरूरतमंदों को सहायता दी तो किसी ने दवाई आदि देकर यह दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। लाॅकडाउन में हजारों किलोमीटर का सफर पैदल चलकर पूरा करने वाले मजदूरों ने भी इस बात की प्रशंसा करते हुए कहा कि खाने पीने की कोई परेशानी नहीं हुई । रास्ते में बहुत से ऐसे लोग मिले जिन्होंने खाने पीने का सामना दे दिया तो किसी ने रास्ते के लिए कुछ पैसे दे दिये। जबकि एक कहानी तो ऐसी भी दिखाई दी जहां एक मजदूर परिवार से पैसे लूटने के लिए आए कुछ नौजवानों ने परिवार की तकलीफ के बारे में जान कर उन्हें पांच हजार रूपए दे दिये ताकि उन्हें कोई परेशानी ना हो और जाते हुए उनकी बिटियां के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। ये छोटी मोटी घटनाएं ही हमें जीवन में आगे बढने और भगवान पर आज भी भरोसा करने के लिए प्रेरित करती है।

police story lockdown में दिखा मिला जुला रूप

लाॅकडाउन के समय पुलिस का रूप भी कुछ मिला जुला मिला कहीं पुलिस लोगों की मदद करती नजर आई तो कहीं पुलिस का वहीं क्रुर चेहरा नजर आया जहां एक और अपने बच्चे के बीमार होने की बात करते हुए पुलिस से गिडगिडाता रहा लेकिन पुलिस ने कानूनों का हवाला देकर अपने कर्तव्य पूरा कर दिया। नतीजा बच्चे की मौत हो गई तो कहीं हजारों कदम चल कर थके हारे मजदूरों पर डंडे बरसाकर पुलिस ने अपना क्रुर चेहरा दिखा दिया तो कहीं पुलिस वाले भूखों को खाना और पानी देते नजर आए तो किसी के जन्मदिन पर केक लेकर पहुंचे पुलिस वालों ने सबका दिल जीत लिया।


क्या कहां एनजीओ वरदान फाउंडेशन की अध्यक्षा ने 

neelam rawat

 एनजीओ की अध्यक्षा वरदान फाउंडेशन की अध्यक्षा नीलम रावत से बात की तो उन्होंने कहा कि आज जब देश का हर व्यक्ति परेशान है तो हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने सामथ्र्य के अनुसार लोगों की सहायता करें। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी एनजीओ ने भी मजदूरों को खाने पीने की सामग्री बांटी है । लेकिन जिस प्रकार से कुछ लोग मजबूर लोगों की लाचारी का फायदा उठा रहें है वह बहुत गलत है। यहीं समय है कि आप अपनी देशभक्ति दिखा सकते है। देशभक्ति गाने सुनने या फिर झंडा टांगने से देशभक्ति नहीं आती देशभक्ति का सच्चा अर्थ है ऐसे समय में देश के लोगों की मदद करना। आज के आधुनिक युग में हजारों किलोमीटर का सफल पैदल चलकर पार करना इस समस्यां की गंभीरता को दिखाता है जिससे हम सभी को मिलकर लडना होगा नहीं तो वह समय दूर नहीं जब आप अपने पैसों के साथ यहां अकेले जाओगे और जब परेशानी आएगी तो आपका साथ देने वाला कोई नहीं होगा। कुछ समय ऐसा आता है जब मनुष्य के अस्तित्व पर ही संकट खडा हो जाता है । यह वहीं समय है जब मनुष्य के अस्तित्व पर संकट खडा है । ऐसे समय में सभी को मिलकर एक साथ चलना होगा नहीं तो कब आज भी किसी से पीछे छूट जाओगे पता ही नहीं चल पाएगा।

coronavirus treatment अभी तक नहीं मिला है जिसके कारण लगातार परेशानी पढती जा रही है अब देखना यह है कि कब तक कोरोना वायरस का इलाज मिल पाता है



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