मंगलवार, 5 मई 2020

100 प्रतिशत मृत्यु दर, पहली बार भारत में दिखी यह बीमारी


african swine flu virus
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को मुहाने पर ला कर खडा कर दिया है। भारत भी लॉकडाउन का तीसरा सेशन का सामना कर रहा है । इसी दौरान एक और बीमारी ने भारत में प्रवेश कर लिया है जिसकी मृत्यु दर 100 प्रतिशत है लेकिन राहत की बात यह है कि यह बीमारी सूअरों मेें पाई जा रही है अभी इंसानों में इसके पहुंचने के कोई संकेत नहीं है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस अपना रूप बदल रहा है जिसके कारण भविष्य में यह इंसानों में फैल सकती है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

 जानकारी की जा रही है हासिल 

इस संबंध में पशु पालन मंत्री अतुल बोरा ने बताया कि इस फ्लू का नाम है अफ्रीकन स्वाइन फ्लू । जानकारी के अनुसार यह बीमारी सूअरों में ही पाई है अभी तक जिसमें मृत्यु दर पूरे 100 प्रतिशत है यानि अगर किसी को यह बीमारी हो जाए तो उसकी मृत्यु निश्चत है। इस लिए सावधानी के लिए इस बीमारी से संपर्क में आए सूअरों को मारा जा रहा है ताकि दूसरे सूअरों को इस बीमारी से बचाया जा सकें। जानकारी के अनुसार जो इलाका संक्रमित है उसके एक किलोमीटर के दायरे में सूअरों के सैंपल टेस्ट किए जाएंगे जिसके बाद संक्रमित पाए गए सूअरों को मार दिया जाएगा ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सकें।
मंत्री ने बताया कि यह बीमारी भी फरवरी में सामने आई थी जबकि अप्रैल 2019 में चीन के शिजांग प्रांत में शुरू होने की जानकारी मिली है। वहां से अरूणाचल प्रदेश का क्षेत्र पास पडता है जिसके कारण यह आशंका जताई जा रही है कि वहीं से संक्रमित सूअरों के घूमने के कारण यह बीमारी चीन से अरूणाचल प्रदेश होते हुए असम के सूअरों को अपनी चपेट में ले लिया।

सूअरों में सबसे घातक संक्रामक रोग

जानकारी के अनुसार यह सूअरों में होने वाला अब तक का सबसे ज्यारा संक्रामक रोग है। इससे सूअरों को सांस लेने में परेशानी होती है, बुखार आता है और साथ ही साथ सूअरों की भूखी खत्म हो जाती है। जिसके कारण जल्द ही उनकी मौत हो जाती है। इस बीमारी का सबसे पहला केस 1909 में कीनिया में मिला था जिसके बाद अफ्रीका में होने के कारण इसे अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का नाम दिया गया।

करोडों सूअर मारे जा चुके है इस बीमारी से 

अगर इस बीमारी के प्रसार की बात करें तो पता चलता है कि एक अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की चपेट में आए हुए सुअर जब किसी दूसरे स्वस्थ सूअर के संपर्क में आता है तो यह बीमारी फैलती है। सूअर के मांस, लार, खून और टिश्यू से दूसरे सुअर में फैल जाती है। रिसर्च में पता चला है यह बीमारी जंगली सूअरों से घरेलू सूअरों में आई। जबकि यह वायरस फ्रीज में रखे सूअर के मांस में कई सालों तक जिंदा रह सकता है जिसके कारण यह और भी गंभीर हो जाता है। आप इस वायरस की भयानकता का अंदाजा इसी से लगा सकते है कि 2018 में 19 देशों के सूअर इस बीमारी के शिकार हुए थे जिसमें करोडो सूअर मारे गए जबकि अकेले चीन में ही इस बीमारी से लगभग 10 करोड सूअर खत्म हो गए थे। 
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क्‍या ईलाज मिला है अभी तक इसका


इस बीमारी को इतना समय हो गया है लेकिन अभी तक इस बीमारी का ईलाज नहीं मिल सका है हॉलाकि बहुत से देश कोशिश कर रहें है इस बीमारी की वैक्सीन बनाने की पर अब तक इस संबंध में कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है।

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